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Tuesday, March 20, 2012

मेरी क्या ग़लती....

कुछ नया नही लगा राजदीप सरदेसाई के साथ ममता बनर्जी के इंटरव्यू को सुनकर, ठीक ही तो कहा जब सोनिया कॉंग्रेस का प्राइम मिनिस्टर तय करती है, तो ममता भी रेलवे मिनिस्टर तय करती है,

कुछ साल पहले आडवाणी जी का एक ब्लॉग पढ़ा था, फिर याद आ गया, जब चन्द्रसेखर की सरकार से भाजपा ने अपना समर्थन वापस लिया था और कॉंग्रेस ने सपोर्ट किया, राजीव गाँधी ने अपना सरकारी आवास(10 जनपथ) लाल कृष्णा आडवाणी को ये कहकर लेने को कहा की जैसे 7 रेसकोर्स सत्ता का केन्द्रा है वैसे ही 10 जनपथ को विपक्ष का केन्द्रा बना देते हैं, काश उस वक़्त आडवाणी मान गये होते तो आज 10 जनपथ जिसके नाम से जनता की राह झलकती है वास्तविक सत्ता का केन्द्रा ना होता, हाँ शायद कोई और नाम होता, लेकिन जनपथ सुनना ज़्यादा खराब लगता है.
 
मूलतः इस तरह का केन्द्र कम्यूनिस्ट शाशन मे दिखता है जहाँ सत्ता के दो केन्द्रा होते हैं, और  वास्तविक सत्ता सही परिप्रेक्षया मे आभाषी सत्ता की चाभी होती है, पर विडंबना ये है की शायद आज हिन्दुस्तान आभाषी और वास्तविक सत्ता के जाल मे है, जहाँ कहने को तो 7 रेसकॉर्स दिशा दिखता है लेंकिन उस रास्ते का नक्शा 10 जनपथ से आता है. 547 सांसद तो सीधे जनता से आते हैं लेकिन उनका मुखिया कहीं किसी की दया से आता है, ना तो वो कोई निर्णय खुद से ले सकता है और ना ही अपने सहयोगी चुन सकता है, कोई ममता चुनती है तो कोई करुणानिधि.... खैर PM तो है उनका क्या जाता है.

हो सकता है कल और बदला हुआ आए, ममता के मंत्री को धोती कुर्ता पहनना अनिवार्य हो और करुणान्निधि के मंत्री को लुँगी, देश का क्या है ये तो तब भी चलता था, अभी भी चल रहा है, आगे भी चलता ही रहेगा, हम जैसे लोग गलिया देते रहेंगे, हमारा भी वक़्त बहल जाता है कुछ खरी खोती सुना के ...... चलता है.......

लेकिन ममता दीदी, आपकी इस बात से तो हम भी आपके साथ है रेलवे मिनिस्टर तो आप का ही होगा, अच्छा होता अगर आप खुद ही बन जाती, CM है तो क्या वैसे भी बंगाल के 20-30 विभाग तो आपके पास ही होंगे एक हिन्दुस्तान का भी रखिए...... चलता रहेगा, ट्रेन नही तो बस सही..... वरना मुलायम जी की साइकल तो है ही...  चलता हूँ आपका अगला इंटरव्यू ज़रूर देखूँगा......

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