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Friday, November 14, 2014

इस रात की सुबह नहीं।

सन्नाटो की आवाज़ो में, आवाज़ो की ख़ामोशी में
खाक सुबह हो पायेगी, जब नींद नहीं आ पाएगी 

कब तक समझायें, जब खुद ही उलझे रहते हैं 
इस पल उस पल हर पल, खुद ही खोये रहते हैं

न राह पता , ना साथ पता, बस चलते रहते हैं 
जब खुद ही खोये बैठे हैं तो, बस ………

बस रहने देते हैं …… 


P.S. - something irrelevant, irrational, unidentified, unproved and ignorant - even I am confused !